अष्ट-संस्कारित पारद

parad shivling thumbभावप्रकाश में पारा चार प्रकार का लिखा गया है श्वेत, रक्त, पीत और कृष्ण । इसमें श्वेत श्रेष्ठ है । वैद्यक में पारा कृमिनाशक और कुष्ठनाशक, नेत्रहितकारी, रसायन, मधुर आदि छह रसों से युक्त, स्निग्ध, त्रिदोषनाशक, योग-वाही, शुक्रवर्धक और एक प्रकार से संपूर्ण रोगनाशक कहा गया है । पारे में मल, वह्नि, विष, नाम इत्यादि कई दोष मिले रहते हैं, इससे उसे शुद्ध करके प्रयोग में लाना चाहिए । पारा शोधने की अनेक विधियाँ वैद्यक के ग्रंथों में मिलती हैं ।
शोधन कर्म आठ प्रकार के कहे गए हैं स्वेदन, मर्दन, मूर्छन, उत्थापन, पातन, बोधन, नियामन और दीपन ।

अगर पारद अष्ट-संस्कारित (सिद्ध) हो तो प्राप्त होने वाले लाभ की तुलना नहीं की जा सकती है। संस्कारित पारद दर्शन, धारण एवं पूजन के लिये महा कल्याणकारी माना गया है. इसी प्रकार संस्कारित पारद से बनी अन्य वस्तुएं जैसे की पारद शिवलिंग, पारद शंख, पारद श्रीयंत्र, इत्यादि के उपयोग से जीवन में इच्छित फलो की प्राप्ती संभव होती हैं।। रसचण्डाशुः नामक ग्रन्थ में कहा गया है-

    शताश्वमेधेन कृतेन पुण्यं गोकोटिभिरू स्वर्णसहस्रदानात।
    नृणां भवेत् सूतकदर्शनेन यत्सर्वतीर्थेषु कृताभिषेकात्।। 6।।

अर्थात सौ अश्वमेध यज्ञ करने के बाद, एक करोड़ गाय दान देने के बाद या स्वर्ण की एक हजार मुद्राएँ दान देने के पश्चात् तथा सभी तीर्थों के जल से अभिषेक (स्नान) करने के फलस्वरूप जो जो पुण्य प्राप्त होता है, वही पुण्य केवल पारद के दर्शन मात्र से होता है।

स्कंद पुराण, रस रत्नाकर, निघंटु प्रकाश, शिवनिर्णय रत्नाकर आदि प्राचीन भारतीय ग्रंथ के अनुसार पारद निर्मित शिवलिंग, पारद शंख, पारद श्रीयंत्र, पारद गुटिका, पारद पेंडेंट, पारद पिरामिड, पारद लक्ष्मी गणेश, पारद पात्र,पारद मुद्रिक इत्यादि के उपयोग से चमत्कारिक लाभ प्राप्त होते हैं।
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ग्रंथो के ही अनुसार पारद के प्रयोग करने से पहले उसका संस्कारित (सुधिकरण एवं ऊर्जावान ) होना भी अत्यंत आवश्यक है। अगर पारद अष्ट-संस्कारित (सिद्ध) हो तो प्राप्त होने वाले लाभ की तुलना नहीं की जा सकती है। संस्कारित पारद दर्शन, धारण एवं पूजन के लिये महा कल्याणकारी माना गया है. इसी प्रकार संस्कारित पारद से बनी अन्य वस्तुएं जैसे की पारद शिवलिंग, पारद शंख, पारद श्रीयंत्र, इत्यादि के उपयोग से जीवन में इच्छित फलो की प्राप्ती संभव होती हैं।

mahamrityunjay gutika1किन्तु उपरोक्त सभी लाभ व्यक्ति को तभी प्राप्त होते हैं जब वह पूर्ण शास्त्रीय प्रणाली से निर्मित अष्ट संस्कारित पारद से बने गुटिका माला विग्रह आदि का प्रयोग पूजन करता है. किन्तु कलियुग में अधिकतम लाभ हेतु अनुचित मार्ग पर चलने से न डरने वाले व्यापारियों ने साधकों, पूजकों से लाभ कमाने हेतु नकली पारद विग्रहों का विक्रय प्रारंभ कर दिया है. वो बाज़ार से पारा खरीद कर उसमे नीला थोथा अथवा एल्मुनियम सीसा आदि विषैले तत्वों को घोल कर ठोस बना कर उससे पारद विग्रह आदि बना कर बेच रहे हैं. उसका परिणाम है ऐसी वस्तुयें प्रयोग करने पर न केवल साधक धारक के लिए प्राणघातक साबित हो रही हैं अपितु कोई आध्यात्मिक लाभ न होने पर उसका शास्त्रों से विश्वास भी टूट रहा है.

parad mercury shriyantra 1 58अत: सस्ता पारद वस्तु न खरीद कर पूर्ण शास्त्रीय प्रणाली से निर्मित अष्ट संस्कारित पारद से निर्मित गुटिका माला शिवलिंग विग्रह आदि एकमात्र विस्वसनीय स्थान से ही प्राप्त करें. Click HereMaha Martunjay

  

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