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शिव शक्ति ज्योतिष एवं पराविज्ञान शोध सेवा केन्द्र

  • अष्ट संस्कारित पारद
  • नवपाषाणम
  • अष्टधातु
  • रत्न गुटिका
पारद अष्ट-संस्कारित (सिद्ध) हो तो प्राप्त होने वाले लाभ की तुलना नहीं की जा सकती है। संस्कारित पारद दर्शन, धारण एवं पूजन के लिये महा कल्याणकारी माना गया है. पारद शिवलिंग, पारद शंख, पारद श्रीयंत्र, इत्यादि के उपयोग से जीवन में इच्छित फलो की प्राप्ती संभव होती हैं।
नवपाषाण का निर्माण गोरक्ष संहिता में वर्णित 64 विषों (औषधियों) में से नौ के सत्व को संस्कारित पारद से दिव्य जड़ी बूटियों के रस के माध्यम से सायुज्जिकरण करके किया जाता है। इसके धारण करने से पूर्ण सकरात्मक ऊर्जा, तीव्र अध्यात्मिक अनुभव, स्वस्थ शरीर की प्राप्ति होती है।
आठ धातुओं यानि सोना, चाँदी, तांबा, रांगा, जस्ता, सीसा, लोहा, तथा पारा (रस) से मिलकर शास्त्रों में वणिंत विधि से अष्टधातु का निर्माण होता है. प्राचीन काल से ही सभी उर्जावान देवस्थलों की उर्जा का मुख्य स्रोत रहा है वहां स्थापित अष्टधातु से निर्मित विग्रह. प्रत्येक धातु में विशिष्ट ऊर्जा निहित होती है.
विभिन्न ग्रहों एवं तत्वों के प्रतिनिधि के स्वरूप में प्रकृति में पाए जाने वाले बहुमूल्य रत्नों एवं उपरत्नो के सत्व को अष्टसंस्कारित पारद के साथ सायुज्जिकरण करके रत्न गुटिका, नवरत्न गुटिका एवं नवग्रह गुटिका का निर्माण होता है. कुंडली के अनुसार इनको धारण करने पर अत्यंत विशिष्ट सकारात्मक प्रभाव दृष्टिगोचर होते हैं.
  • कुंडली निर्माण एवं विश्लेषण +

    प्रत्येक जातक के प्रारब्ध के अनुसार उसके जीवन की दिशा निश्चित होती है. किन्तु यदि उचित प्रकार से जन्म पत्रिका का अध्ययन और विश्लेषण किया जाये तो भविष्य की हानिकारक परिस्थितियों से बचाव और सौभाग्य में वृद्धि की जा सकती है.
  • यज्ञ-पूजा-अनुष्ठान +

    जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सौभाग्य वृद्धि और दुर्भाग्य नाश हेतु वैदिक और तंत्रोक्त ग्रंथों में अनेक प्रकार के पूजा-यज्ञ-अनुष्ठान-साधनाओं को वर्णित किया गया है. किन्तु सामान्य गृहस्थ अपनी दैनिक दिनचर्या में ही इस प्रकार उलझा होता है की वो पूर्ण नियमों और विधि विधानों का पालन न कर पाने के कारण इनका लाभ नही उठा पाता. हमारे संस्थान के योग्य एवं प्रक्षिशित आचार्यों द्वारा जातकों हेतु संकल्प लेकर पूर्ण विधि विधान से इन अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है जिससे जातक को इनका पूर्ण लाभ मिल सके.
  • वास्तु विश्लेषण +

    अनेक जातकों के घर या व्यवसाय स्थल के निर्माण में अज्ञानतावश ऐसी त्रुटियाँ हो जाती हैं जो वास्तुशास्त्र के नियमों के अनुसार अशुभ होती हैं. इस कारण जातक के जीवन में लगातार किसी न किसी प्रकार की समस्या बनी ही रहती है और वो अत्यधिक प्रयत्न करने पर भी उनसे छुटकारा नही पाता. हमारे द्वारा समस्या के कारण का विश्लेषण करने के पश्चात वास्तुशास्त्र के प्राचीन और आधुनिक व्यवहारिक उपायों के द्वारा वास्तु दोषों को दूर किया जाता है जिससे जातक के जीवन में पुनः सौभाग्य का उदय होता है.
  • रत्न उपचार +

    जातकों की कुंडली में ग्रह दशाओं के आधार पर रत्न धारण करने पर दुर्बल ग्रहों को बल और शुभ ग्रहों के असर में वृद्धि होने से जातक के सौभाग्य का उदय होता है. परन्तु कलियुग में बनावटी और निम्न गुणवत्ता के रत्नों के अधिक प्रचलित होने के कारण जातक को लाभ नही मिलता बल्कि ऐसे रत्न को धारण करने पर उल्टा हानि उठानी पड़ती है. हमारे संस्थान द्वारा भारत सरकार से प्रमाणित टेस्टिंग लैब द्वारा जांचे परखे और सर्टिफिकेट युक्त रत्न उपलब्ध कराये जाते हैं.
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शिव शक्ति ज्योतिष एवं पराविज्ञान शोध सेवा केन्द्र ही क्यों ?

शिव शक्ति ज्योतिष एवं पराविज्ञान शोध सेवा केंद्र एकमात्र केंद्र है जो जातकों की समस्याओं के निवारण हेतु पूर्णरूपेण शास्त्रसम्मत अनुष्ठान, पूजा, उपाय, रत्न, कुंडली विश्लेषण एवं फलादेश प्रदान करता है.



उपाय

दैनिक जीवन हेतु अत्यंत सरल वैदिक और तंत्रोक्त उपाय.

अनुष्ठान

योग्य एवं प्रशिक्षित आचार्यों द्वारा शक्तिशाली अनुष्ठान.

रत्न

लैब रिपोर्ट के साथ उपलब्ध उच्च गुणवत्ता के प्रामाणिक रत्न




यंत्र

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पूजन

सनातन परम्परा में प्रचलित त्योहारों और विशेष अवसरों हेतु शुद्ध पूजन सामग्री

कुंडली

जातकों के कुंडली का सूक्ष्म अध्ययन एवं विश्लेषण के पश्चात फलादेश और उपाय

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विशेष अनुष्ठान

पूजा, अर्चना, मंत्र जाप के अतिरिक्त वैदिक परम्परा में विभिन्न प्रकार के देवी देवताओं और शक्तियों की विभिन्न वैदिक और तंत्रोक्त विधि के अनुसार अनुष्ठान करने के भी निर्देश दिए गये हैं. किन्तु नियमों का पालन करने में असमर्थ होने के कारण आप उसका लाभ नही उठा पाते. अत: हमारे योग्य आचार्यों के द्वारा जातक हेतु पूर्ण विधि विधान से अनुष्ठान करने पर जातक को उसका पूरा लाभ मिलता है.



दुर्लभ संग्रह

शिव शक्ति ज्योतिष एवं पराविज्ञान शोध सेवा केन्द्र लाये हैं आपके लिए ऐसे दुर्लभ संग्रह जो किसी भी रूप में आपके पास होने या धारण करने पर आपके जीवन में चमत्कारी प्रभाव उत्पन्न करते हैं. विभिन्न ग्रंथों में वर्णित इन वस्तुओं की प्राप्ति ही अत्यंत सौभाग्य का लक्षण है. 



  • icon नवपाषाण गुटिका / माला
  • icon अष्टधातु

navpashan malaनवपाषाण गुटिका

यह गुटिका ब्रहमांड की दुर्लभतम वस्तुओ में से एक है । इसको धारण करने वाले जातक को तीव्र अध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होते है। इस गुटिका से विशेष प्रकार की प्रबल उर्जा तरंगे निकलती है जिसे कुछ ख़ास उपकरणों से नापा जा सकता है।
इस गुटिका का निर्माण गोरक्ष संहिता में वर्णित 9 दिव्य रत्नों को एक साथ मिलाकर पारद से सायुज्जिकरण करके दिव्य जड़ी बूटियों के रस से एकाकार कर किया जाता है।
इसमें जिन 9 दिव्य रत्नों का इस्तमाल किया जाता है वो है :-

 

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 अष्टधातु, (शाब्दिक अर्थ = आठ धातुएँ) एक मिश्रधातु है जो हिन्दू और जैन प्रतिमाओं के निर्माण में प्रयुक्त होती है। जिन आठ धातुओं से मिलकर यह बनती है, वे ये हैं- सोना, चाँदी, तांबा, सीसा, जस्ता, टिन, लोहा, तथा पारा (रस) की गणना की जाती है। एक  प्राचीन ग्रन्थ में इनका निर्देश इस प्रकार किया गया है:

 

    स्वर्ण रूप्यं ताम्रं च रंग यशदमेव च।
   शीसं लौहं रसश्चेति धातवोऽष्टौ प्रकीर्तिता:।

     ज्योतिष और अष्टधातु का महत्व

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