कुण्डली विश्लेषण

15 March 2016 Written by कुंडली 308
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जन्म चार्ट या नेटल चार्ट आपके जन्म के समय पर ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। अलग-अलग घरों में अलग-अलग ग्रहों का वर्णन होता है, यह बताता है कि आपके बड़े होने पर आपका जीवन कैसा होगा। यह आपके व्यक्तित्व, करियर, वित्त, विवाह, बच्चों, परिवार, स्वास्थ्य और आपके जीवन के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर कर सकता है। विवाह के समय कुंडली मिलान के लिए भी जन्म कुंडली का उपयोग किया जाता है।

कुंडली
किसी भी व्यक्ति की जन्म कुंडली उसके जन्म लेने के समय पर ग्रहों और नक्षत्रों की चाल से तय होती है। वैदिक ज्योतिष में जन्म कुंडली का विशेष महत्व होता है। जन्म कुंडली में 12 खाने बने होते हैं जिसे ज्योतिष की भाषा में भाव कहते है। जन्म कुंडली बनाने के लिए 12 राशियों का उपयोग किया जाता है जो कि 12 अलग भावों में अलग-अलग राशियों आती है और हर एक भाव में एक राशि आती है। जन्म कुंडली की मदद से मनुष्य के भूत, वर्तमान और भविष्य के बारें में आकलन किया जा सकता है। कुंडली की मदद से राशियों और नक्षत्रों में सूर्य, चंद्रमा और दूसरे अन्य ग्रहों की स्थिति भी जान सकते हैं। जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण होती है ग्रहों के अध्ययन के बिना कुंडली नहीं बन सकती है। कुंडली में भाव,ग्रह, दशा और गोचर का विशेष ध्यान रखा जाता है।
कुंडली बनाने के फायदे
ज्योतिष शास्त्र में व्यक्ति की जन्म कुंडली का विशेष महत्व होता है और यह उसके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कुंडली से व्यक्ति के भविष्य और इसके गुणों के बारे में आसानी से पता लगाया जा सकता है। कुंडली से व्यक्ति को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं।
कुंडली की मदद से आसानी से व्यक्ति के भविष्य के बारे में भविष्वाणी की जा सकती है।
कुंडली की सहायता से कैरियर संबंधी जानकारियां जैसे नौकरी और व्यापार के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है।
कुंडली की सहायता अपने लिए भाग्यशाली रत्न, रंग और संख्या के बारे में पता किया जा सकता है।
कुंडली की मदद से भविष्य में आने वाली परेशानियां जैसे आर्थिक संकट, दुर्घटना और बीमारियों के बारे में संकेत मिल जाता है।
कुंडली बनवाने से व्यक्ति के स्वभाव, करियर, विवाह और जीवन के तमाम तरह के अन्य पहुलओं का बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
कुंडली की सहायता से आने वाले समय में अपने लिए अच्छे समय और बुरे समय के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
कुंडली से मंगल दोष, पितृ दोष, नाड़ी दोष समेत कई अन्य दोषों के बारे में भी जाना जाता है।

भारत में एक रिवाज है जब भी किसी के यहां संतान होती है तो उसकी जन्म कुंडली जरूर बनवाई जाती है। दरअसल जन्मकुंडली बच्चे के जन्म के समय ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति और दशा पर निर्भर करती है। जन्म कुंडली के आधार पर उस व्यक्ति के जीवन में घटने वाली घटनाओं के बारे में भविष्यवाणी की जाती है।  जन्म कुंडली बनाने के लिए अपना नाम, जन्मतिथि और जन्म स्थान का ब्यौरा भेजकर अपना और अपने परिवार के सदस्यों की जन्म कुंडली बनवा सकते हैं।

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